Thursday, December 8, 2022

Online News Portal

वायुसेना दिवस: राष्ट्रपति द्रौपदी...

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह। - फोटो : फाइलख़बर...

Mohan Bhagwat: वर्ण-जाति व्यवस्था...

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत। - फोटो : amar ujalaख़बर सुनेंख़बर सुनें...

Startup India : स्टार्टअप...

ख़बर सुनेंख़बर सुनेंStartup India : देश में स्टार्टअप को बढ़ावा...

Air Force Day: आज...

वायुसेना दिवस पर चंडीगढ़ के साथ शनिवार को पूरी दुनिया भारतीय वायुसेना...
Homeभारतराजस्थान की ये...

राजस्थान की ये अदावत नई नहीं है! तब राजेश पायलट और गहलोत में भी नहीं जमती थी, 1993 की बात है…


नई दिल्ली: राजस्थान में इस समय कुर्सी का खेल चल रहा है। अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे, इधर अगले सीएम की चर्चा पर पार्टी में फूट पड़ गई। गहलोत का खेमा सचिन पायलट (Sachin Pilot) की बजाय किसी अपने को नया सीएम बनाना चाहता है। इसके लिए उसने तीन शर्तें भी रख दीं। इसे सीधे पार्टी हाईकमान को दी गई चुनौती माना गया है। थोड़ा पीछे जाकर देखें तो अशोक गहलोत और सचिन पायलट की कभी जमी नहीं है। दो साल पहले तब पायलट ने अपने तेवर दिखाए थे। अब ‘जादूगर’ का खेल पूरा राजस्थान देख रहा है। यही नहीं, सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट (Rajesh Pilot) और अशोक गहलोत में भी कभी दोस्ती नहीं रही। राजेश पायलट को जहां मौका मिलता वह गहलोत को सुनाने से नहीं चूकते। दरअसल, गहलोत और राजेश पायलट ने एक साथ ही राजनीति में कदम रखा था। दोनों की राजीव गांधी से अच्छी बनती थी। लेकिन दोनों में छत्तीस का आंकड़ा भी था। 1993 में जोधपुर में ऐसा ही कुछ हुआ जिससे गहलोत और पायलट के बीच कड़वाहट खुलकर सामने आ गई थी।

केंद्र में मंत्री थे राजेश पायलट और…
तब राजेश पायलट केंद्र में संचार राज्य मंत्री हुआ करते थे। उन्हें जोधपुर में मुख्य डाकघर के एक भवन का उद्घाटन करना था। उस समय अशोक गहलोत जोधपुर से सांसद थे और पार्टी भी दोनों की एक ही कांग्रेस थी, फिर भी गहलोत को कार्यक्रम का न्योता नहीं भेजा गया था। गहलोत को न देख कार्यक्रम में पहुंचे उनके समर्थक नाराज हो गए। उन्होंने सीधे पायलट से ही पूछ लिया कि हमारे सांसद कहां हैं, कहीं दिख नहीं रहे हैं। इस पर राजेश पायलट ने कटाक्ष किया था कि यहीं कहीं होंगे बेचारे गहलोत। दोनों एक राज्य से थे और तमाम समानताओं के बाद भी शायद एक दूसरे की सफलता खटकती थी। 1993 में ही गहलोत से मंत्री पद ले लिया गया था और पायलट का जलवा जारी था।

1986 में एक कार्यक्रम के दौरान राजीव गांधी के साथ राजेश पायलट।

राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद तिवारी बताते हैं कि राजेश पायलट कुछ इसी नेचर के थे। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर के चुनाव क्षेत्र में वह मूर्ति का अनावरण करने आए थे लेकिन उन्हें जयपुर ही छोड़ आए। वह दिल्ली से प्लेन से जयपुर आए थे लेकिन शिवचरण माथुर घर से एयरपोर्ट पहुंचने में देर कर दिए तो वह उन्हें छोड़कर ही मूर्ति का अनावरण करने पहुंच गए। तब माथुर ने पायलट पर तंज कसा था कि इतना तेज मत उड़िए।

राजीव गांधी के साथ अशोक गहलोत।

गहलोत को मिलता रहा वफादारी का इनाम
गांधी परिवार के वफादार होने का गहलोत को हमेशा इनाम मिलता रहा है। वह इंदिरा गांधी की सरकार से लेकर राजीव गांधी और बाद में सोनिया गांधी के समय में सत्ता का स्वाद चखते रहे। गांधी परिवार उन पर आंख मूंदकर भरोसा करता आया है। लेकिन 1993 का दौर ऐसा था जब सोनिया गांधी सक्रिय नहीं थीं और गहलोत हाशिए पर चले गए थे। दूसरी तरफ पायलट का कद बढ़ रहा था। हालांकि ‘जादूगर’ ने मौका मिलते ही खेल दिखाया और आगे चलकर राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हो गए। 1998 के बाद तो जैसे गहलोत की लॉटरी लग गई। सोनिया गांधी सक्रिय हुईं और गहलोत का कद बढ़ने लगा। उधर, कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में गहलोत सोनिया गांधी के साथ खड़े रहे लेकिन राजेश पायलट ने जितेंद्र प्रसाद का साथ दिया था। शायद इसी का इनाम देते हुए पार्टी हाईकमान ने गहलोत को राजस्थान की कमान सौंप दी।

navbharat timesजब अशोक गहलोत ने कहा निकम्मा, नकारा…,जवाब में सचिन पायलट ने की पिता से तुलना, धैर्य की राहुल गांधी ने भी की तारीफ
पूर्व सीएम को दरकिनार कर गहलोत को मिली तवज्जो
जी हां, 1998 में जब अशोक गहलोत पहली बार राजस्थान के सीएम बने तब वह विधायक नहीं थे। उनके लिए बाकायदा सीट खाली की गई थी। पत्रकार प्रमोद तिवारी कहते हैं कि जब गहलोत को सीएम बनाने का फैसला किया गया उस समय राजस्थान कांग्रेस में दो अन्य लोग सीएम के प्रबल दावेदार थे लेकिन पार्टी हाईकमान ने उन पर भरोसा जताया। गहलोत एमपी थे और राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष भी थे। दो अन्य दावेदारों में वरिष्ठ नेता परसराम मदेरणा और पूर्व सीएम शिवचरण माथुर थे। तब माथुर ने कहा था कि विधायकों में से ही सीएम बनाया जाए। दरअसल, माथुर कैबिनेट में गहलोत गृह मंत्री रह चुके थे और उन्हें यह ठीक नहीं लग रहा था कि सीनियर को दरकिनार किया जाए।

navbharat timesराजस्थान की राजनीति में 1998 में क्या हुआ था? गहलोत खेमे की बगावत से जोड़कर क्यों याद कर रहे लोग?
पत्रकार प्रमोद तिवारी कहते हैं कि गहलोत खेमे ने 25 सितंबर की शाम को जो किया उससे यही संदेश गया है कि उन्होंने पार्टी हाईकमान को चुनौती दी है। ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। हो सकता है पार्टी चुनाव तक रुके और अगला चुनाव सचिन पायलट के नेतृत्व में लड़ा जाए। कांग्रेस अध्यक्ष बनने के गहलोत के सपने को भी ग्रहण लग सकता है।



Source link

Deal of the day

Get notified whenever we post something new!

spot_img

Job Book dot in

सरकारी नौकरी अलर्ट jobbook.in

spot_img

निशुल्क विज्ञापन

विज्ञापन देने के लिए Register Now पर क्लिक करें

Continue reading

लव राशिफल 8 अक्टूबर: इन राशि वालों की लव लाइफ में आएंगी मुश्किलें, टूट सकता है रिश्ता

मेष राशि: सबसे ज्यादा संभावना वाले स्थानों में रोमांस खिल सकता है, इसलिए इसके संकेतों के लिए अपनी आंखें खुली रखें। आपके पास सहकर्मी क्रश के साथ ज्यादा समय बिताने का अवसर हो सकता है। अगर आप दोनों...

वायुसेना दिवस: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह आज चंडीगढ़ में, सुखना पर देखेंगे एयर शो

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह। - फोटो : फाइलख़बर सुनेंख़बर सुनेंराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शनिवार दोपहर चंडीगढ़ पहुंचेंगे। दोनों लोग वायुसेना दिवस पर सुखना लेक पर होने वाले एयर...

Fact Check: एटीएम से 4 बार से ज्यादा निकाले रुपये तो कटेंगे 173 रुपये! क्या आपके पास आया बैंक का ये मैसेज? जानें सच्चाई

नई दिल्ली: अगर आपने एटीएम से 4 बार से ज्यादा रुपये निकाले तो आपको 173 रुपये कट जाएंगे। इसका मतलब है कि बैंक के एटीएम से आप 4 बार ही फ्री में रुपये निकाल सकते हैं। इसके बाद...

ताजा तरीन खबरें प्राप्त करें

सोशल मिडिया अकाउंट के माध्यम से हमसे जुड़े