Sunday, November 27, 2022

Online News Portal

वायुसेना दिवस: राष्ट्रपति द्रौपदी...

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह। - फोटो : फाइलख़बर...

Mohan Bhagwat: वर्ण-जाति व्यवस्था...

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत। - फोटो : amar ujalaख़बर सुनेंख़बर सुनें...

Startup India : स्टार्टअप...

ख़बर सुनेंख़बर सुनेंStartup India : देश में स्टार्टअप को बढ़ावा...

Air Force Day: आज...

वायुसेना दिवस पर चंडीगढ़ के साथ शनिवार को पूरी दुनिया भारतीय वायुसेना...
Homeब्रेकिंगमौत के ढाई...

मौत के ढाई महीने बाद क्यों हुआ जापान के पूर्व पीएम का अंतिम संस्कार? समझें पूरी प्रक्रिया

जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे का आज स्टेट फ्यूनरल (राजकीय अंतिम संस्कार) टोक्यो में हुआ। इसमें दुनियाभर के 217 देशों के प्रतिनिधि शामिल होने के लिए टोक्यो पहुंचे। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी टोक्यो पहुंचकर आबे को अंतिम विदाई दी। ये दुनिया का सबसे महंगा अंतिम संस्कार बताया जा रहा है। इसमें 97 करोड़ रुपये खर्च हुए। 

शिंजो आबे की आठ जुलाई को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोपी को मौके से ही पकड़ लिया गया था। ऐसे में आप सोच रहे होंगे कि आठ जुलाई को जब आबे की मौत हो गई थी, तो अब ढाई महीने बाद उनका अंतिम संस्कार क्यों हुआ है? जापान में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया क्या होती है? आइए जानते हैं…
 

क्यों आज हो रहा अंतिम संस्कार? 

दरअसल आठ जुलाई को शिंजो आबे की हत्या हुई थी। इसके बाद परिवार ने बौद्ध परंपरा के अनुसार 15 जुलाई को उनका अंतिम संस्कार कर दिया था। आज जो स्टेट फ्यूनरल यानी राजकीय अंतिम संस्कार हुआ है वो सांकेतिक है। इसमें आबे की अस्थियों को श्रद्धांजलि के लिए रखा गया। आबे की अंतिम विदाई के लिए दुनियाभर के 217 देशों के प्रतिनिधि पहुंचे हैं। इस दौरान लोगों ने आबे से जुड़ी अपनी पुरानी यादों को साझा किया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसके लिए जापान पहुंचे हैं। शिंजो आबे पीएम मोदी के अच्छे दोस्तों में से एक रहे हैं। 

जापान में कैसे होता है अंतिम संस्कार? 

जापान में ज्यादातर लोग बौद्ध परंपरा के अनुसार शवों का अंतिम संस्कार करते हैं। इस परंपरा के अनुसार, मरने के बाद परिजन मृतक के होंठों पर पानी लगाते हैं। जिसे अंतिम समय का जल कहा जाता है। 

मौत के अगले दिन ‘वेक’ की परंपरा है, जिसमें जान-पहचान वाले लोग जुटते हैं। वह मृतक की बॉडी का आखिरी दर्शन करते हैं। इस दौरान उनसे जुड़ी यादों को साझा करते हैं। पुरुष काले सूट, सफेद शर्ट और काली टाई लगा कर आते हैं। वहीं, महिलाएं काले रंग के कपड़े पहन कर आती हैं। कई बार लोग मृतक के परिजनों को काले या सिल्वर रंग के लिफाफे में पैसे भी देते हैं। बौद्ध परंपरा के अनुसार मंत्र भी पढ़े जाते हैं।
 

इसके बाद हिंदू धर्म की तरह शवों को अग्नि के हवाले कर दिया जाता है। मतलब शव को जलाने से जुड़ी परंपरा है। इलेक्ट्रिक शवदाह गृह के एक चेंबर में ताबूत को धीरे-धीरे खिसका दिया जाता है। इस दौरान परिजन वहां मौजूद रहते हैं। ताबूत के पूरी तरह से चेंबर में जाने के बाद परिजन वापस घर चले जाते हैं। दो से तीन घंटे बाद परिजनों को फिर से बुलाया जाता है और उन्हें मृतक के अवशेष दिए जाते हैं। परिजन चॉप स्टिक से हड्डियों को इकट्ठा करके कलश में रखते हैं। सबसे पहले पैर और फिर सिर की हड्डी कलश में रखी जाती है।
 

Source link

Deal of the day

Get notified whenever we post something new!

spot_img

Job Book dot in

सरकारी नौकरी अलर्ट jobbook.in

spot_img

निशुल्क विज्ञापन

विज्ञापन देने के लिए Register Now पर क्लिक करें

Continue reading

लव राशिफल 8 अक्टूबर: इन राशि वालों की लव लाइफ में आएंगी मुश्किलें, टूट सकता है रिश्ता

मेष राशि: सबसे ज्यादा संभावना वाले स्थानों में रोमांस खिल सकता है, इसलिए इसके संकेतों के लिए अपनी आंखें खुली रखें। आपके पास सहकर्मी क्रश के साथ ज्यादा समय बिताने का अवसर हो सकता है। अगर आप दोनों...

वायुसेना दिवस: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह आज चंडीगढ़ में, सुखना पर देखेंगे एयर शो

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह। - फोटो : फाइलख़बर सुनेंख़बर सुनेंराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शनिवार दोपहर चंडीगढ़ पहुंचेंगे। दोनों लोग वायुसेना दिवस पर सुखना लेक पर होने वाले एयर...

Fact Check: एटीएम से 4 बार से ज्यादा निकाले रुपये तो कटेंगे 173 रुपये! क्या आपके पास आया बैंक का ये मैसेज? जानें सच्चाई

नई दिल्ली: अगर आपने एटीएम से 4 बार से ज्यादा रुपये निकाले तो आपको 173 रुपये कट जाएंगे। इसका मतलब है कि बैंक के एटीएम से आप 4 बार ही फ्री में रुपये निकाल सकते हैं। इसके बाद...

ताजा तरीन खबरें प्राप्त करें

सोशल मिडिया अकाउंट के माध्यम से हमसे जुड़े