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Shardiya Navratri Live: मां शक्ति की आराधना ‘ॐ जय अम्बे गौरी ‘ की आरती और ‘दुर्गा सप्तशती’ पाठ के बिना अधूरी


03:50 PM, 26-Sep-2022


शारदीय नवरात्रि में जरूर करें दुर्गा स्तुति का पाठ
– फोटो : iStock

शारदीय नवरात्रि में जरूर करें दुर्गा स्तुति का पाठ

दुर्गा स्तुति 

दुर्गे विश्वमपि प्रसीद परमे सृष्ट्यादिकार्यत्रये

ब्रम्हाद्याः पुरुषास्त्रयो निजगुणैस्त्वत्स्वेच्छया कल्पिताः ।

नो ते कोऽपि च कल्पकोऽत्र भुवने विद्येत मातर्यतः

कः शक्तः परिवर्णितुं तव गुणॉंल्लोके भवेद्दुर्गमान् ॥ १ ॥

त्वामाराध्य हरिर्निहत्य समरे दैत्यान् रणे दुर्जयान्

त्रैलोक्यं परिपाति शम्भुरपि ते धृत्वा पदं वक्षसि ।

त्रैलोक्यक्षयकारकं समपिबद्यत्कालकूटं विषं

किं ते वा चरितं वयं त्रिजगतां ब्रूमः परित्र्यम्बिके ॥ २ ॥

या पुंसः परमस्य देहिन इह स्वीयैर्गुणैर्मायया

देहाख्यापि चिदात्मिकापि च परिस्पन्दादिशक्तिः परा ।

त्वन्मायापरिमोहितास्तनुभृतो यामेव देहास्थिता

भेदज्ञानवशाद्वदन्ति पुरुषं तस्यै नमस्तेऽम्बिके ॥ ३ ॥

स्त्रीपुंस्त्वप्रमुखैरुपाधिनिचयैर्हीनं परं ब्रह्म यत्

त्वत्तो या प्रथमं बभूव जगतां सृष्टौ सिसृक्षा स्वयम् ।

सा शक्तिः परमाऽपि यच्च समभून्मूर्तिद्वयं शक्तित-

स्त्वन्मायामयमेव तेन हि परं ब्रह्मापि शक्त्यात्मकम् ॥ ४ ॥

तोयोत्थं करकादिकं जलमयं दृष्ट्वा यथा निश्चय-

स्तोयत्वेन भवेद्ग्रहोऽप्यभिमतां तथ्यं तथैव ध्रुवम् ।

ब्रह्मोत्थं सकलं विलोक्य मनसा शक्त्यात्मकं ब्रह्म त-

च्छक्तित्वेन विनिश्चितः पुरुषधीः पारं परा ब्रह्मणि ॥ ५ ॥

षट्चक्रेषु लसन्ति ये तनुमतां ब्रह्मादयः षट्शिवा-

स्ते प्रेता भवदाश्रयाच्च परमेशत्वं समायान्ति हि ।

तस्मादीश्वरता शिवे नहि शिवे त्वय्येव विश्वाम्बिके

त्वं देवि त्रिदशैकवन्दितपदे दुर्गे प्रसीदस्व नः ॥ ६ ॥

॥ इति श्रीमहाभागवते महापुराणे वेदैः कृता दुर्गास्तुतिः सम्पूर्णा ॥

02:53 PM, 26-Sep-2022

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नवरात्रि में करें मां दुर्गा के इन मंत्रों का जाप
– फोटो : iStock

नवरात्रि में करें मां दुर्गा के इन मंत्रों का जाप  

1- ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

2- या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

3- सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

4- नवार्ण मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’ का जाप अधिक से अधिक अवश्य करें। 

5- पिण्डज प्रवरा चण्डकोपास्त्रुता।

प्रसीदम तनुते महिं चंद्रघण्टातिरुता।।

पिंडज प्रवररुधा चन्दकपास्कर्युत । 

प्रसिदं तनुते महयम चंद्रघंतेति विश्रुत।

02:32 PM, 26-Sep-2022

अखंड ज्योति के नियम

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नवरात्रि 2022 शुभकामना संदेश
– फोटो : amar ujala

  • – ज्योति प्रज्वलित करने से पहले संकल्प लें और मां के सामने दीप प्रज्वलित करें। 
  • – नवरात्रि में जलाई जाने वाली ज्योति को अनवरत नौ दिनों तक जलाया जाता है। इसलिए विशेष ध्यान रखें कि लौ बुझनी नहीं चाहिए।
  • – अखंड ज्योति जलाने के लिए गाय के शुद्ध घी का प्रयोग करें। 
  • – अखंड ज्योति को हमेशा किसी पटरे या चौकी पर ही रखकर जलाना चाहिए। कभी भी भूमि पर रखकर अखंड दीपक न जलाएं। 
  • – अखंड ज्योति की बाती हमेशा कलावा से बनाई जाती है। 
  • – अगर आपने अपने घर में अखंड ज्योति प्रज्वलित की है तो ध्यान रहे की घर को कभी भी अकेला न छोड़े। 
  • – नवरात्रि के समापन या फिर संकल्प पूरा होने के बाद दीपक को खुद ना बुझाएं। उसे ऐसे ही रहने दें। धीरे-धीरे उसे स्वतः ही बुझने दें।

02:27 PM, 26-Sep-2022

नवरात्रि में अखंड ज्योति का महत्व 

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नवरात्रि

नवरात्रि में देवी आराधना,कलश स्थापना और नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने का विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म में हर पूजा-पाठ और शुभ कार्य का आरंभ दीप प्रज्वलित करके किया जाता है। दीप को प्रकाश का द्योतक माना गया है तो वही प्रकाश को ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। दीप जलाने का मतलब होता है मन के अंधकार को दूर करके परमात्मा रूपी प्रकाश को अपने अंदर समाहित करना। इसलिए सबसे पहले दीपक प्रज्वलित किया जाता है।

 

01:35 PM, 26-Sep-2022

नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती पाठ का महत्व

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दुर्गा सप्तशती पाठ के नियम
– फोटो : amar ujala

नवरात्रि पर मां दुर्गा की पूजा-आराधना में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना भक्तों के लिए बहुत ही शुभ और फलदायी माना गया है। मार्कण्डेय पुराण में दुर्गा सप्तशती उल्लेख किया गया है। मां शक्ति की उपासना के लिए दुर्गा सप्तशती श्रेष्ठ ग्रंथ माना है। इसमें 700 श्लोक और 13 अध्याय है। जिसे तीन चरित्रों में बांटा गया है। पहले चरित्र में महाकाली,दूसरे चरित्र में महालक्ष्मी और तीसरे चरित्र में महा सरस्वती है। 

दुर्गा सप्तशती के 13 अध्याय 

1. प्रथम अध्याय : इस अध्याय में मेधा ऋषिका राजा सुरथ और समाधि को भगवती की महिमा बताते हुए मधु कैटभ का प्रसंग

2. द्वितीय अध्याय : दुर्गा सप्तशती के दूसरे अध्याय में देवताओं के तेज से देवी मॉं का प्रादुर्भाव और महिषासुर की सेना का वध

3. तृतीय अध्याय : इस अध्याय में मां दुर्गा द्वारा सेनापतियों सहित महिषासुर का वध

4. चतुर्थ अध्याय : इंद्र समेत सभी देवी- देवताओं द्वारा देवी मां की स्तुति

5. पंचम अध्याय : देवी की स्तुति और चण्ड-मुण्ड के मुख से अम्बिका के रूप की प्रशंसा सुनकर शुम्भ का उनके पास दूत भेजना और फिर दूत का निराश लौटना

6. षष्ठम अध्याय : धूम्रलोचन- वध

7. सप्तम अध्याय : चण्ड-मुण्ड का वध

8. अष्टम अध्याय : रक्तबीज का वध का वर्णन

9. नवम अध्याय : विशुम्भ का वध

10. दशम अध्याय : शुम्भ का वध

11. एकादश अध्याय : सभी का वध करने के बाद देवताओं के द्वारा देवी की स्तुति,  देवी द्वारा देवताओं को वरदान देना

12. द्वादश अध्याय : देवी-चरित्रों के पाठ का माहात्म्य

13. त्रयोदश अध्याय : सुरथ और वैश्य को देवी का वरदान

01:11 PM, 26-Sep-2022

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करने से कौन से फल की होती है प्राप्ति ?

मां शैलपुत्री – पूजाफल

मां शैलपुत्री देवी पार्वती का ही स्वरूप हैं जो सहज भाव से पूजन करने से शीघ्र प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करती हैं। मन विचलित होता हो और आत्मबल में कमी हो तो मां शैलपुत्री की आराधना करने से लाभ मिलता हैं।

मां शैलपुत्री का स्तवन मंत्र

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

12:33 PM, 26-Sep-2022

नवरात्रि पर नौ दिन माता को कौन- कौन सा भोग लगाएं

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मां दुर्गा के नौ स्वरूप और उनके मनपसंद नौ भोग
– फोटो : अमर उजाला

मां शैलपुत्री- मां को गाय के घी का भोग लगाना शुभ। इससे आरोग्य की प्राप्ति होती है।

मां ब्रह्मचारिणी- नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर और पंचामृत का भोग लगाएं। 

मां चंद्रघंटा- मां को दूध से बनी मिठाइयां,खीर आदि का भोग लगाएं।

मां कूष्मांडा- नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग लगाया जाता है। 

मां स्कंदमाता- पांचवें दिन स्कंदमाता को केले का भोग चढ़ाया जाता है। 

मां कात्यायनी- नवरात्रि के छठें दिन देवी कात्यायनी को हलवा,मीठा पान और शहद का भोग लगाएं।

मां कालरात्रि-  सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा होती है। इस दिन देवी कालरात्रि को गुड़ से निर्मित चीजों का भोग लगाना चाहिए। 

मां महागौरी- माता महागौरी को नारियल का भोग बेहद प्रिय है, इसीलिए नवरात्रि के आठवें दिन भोग के रूप में नारियल चढ़ाएं।  

मां सिद्धिदात्री-  माता सिद्धिदात्री को हलवा-पूड़ी और खीर का भोग लगाएं।

12:14 PM, 26-Sep-2022

नवरात्रि में क्यों जलाई जाती है अखंड ज्योति?

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नवरात्रि का त्योहार मां शक्ति की आराधना का होता है। नौ दिनों तक देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है। दुर्गा पूजा के बड़े-बड़े पांडाल सजाए जाते हैं। नवरात्रि पर नौ दिनों तक व्रत रखा जाता है और सबसे खास बात नवरात्रि के नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने की परंपरा होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर क्यों नवरात्रि पर अखंड ज्योति जलाते हैं… यह पढ़ें पूरी खबर

 

11:59 AM, 26-Sep-2022

नवरात्रि के पहले दिन क्यों करते हैं कलश स्थापना?

हिंदू धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि पर देवी दुर्गा नौ दिनों के लिए पृथ्वी पर वास करती हैं। नौ दिनों तक हर दिन देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है। क्या आप जानते हैं नवरात्रि पर कलश स्थापना क्यों की जाती हैं…. यहां पढ़ें 

 

11:41 AM, 26-Sep-2022

नवरात्रि का पहला दिन- मां शैलपुत्री की होती है आराधना

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– फोटो : अमर उजाला

आज मां दुर्गा के पहले स्वरूप देवी शैलपुत्री की पूजा-आराधना की जा रही है। आइए जानते हैं मां शैलपुत्री की जन्म कथा…

मां दुर्गा अपने पहले स्वरूप में शैलपुत्री के नाम से पूजी जाती हैं। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। अपने पूर्व जन्म में ये प्रजापति दक्ष की कन्या के रूप में उत्पन्न हुई थीं तब इनका नाम सती था। इनका विवाह भगवान शंकरजी से हुआ था। एक बार प्रजापति दक्ष ने बहुत बड़ा यज्ञ किया जिसमें उन्होंने सारे देवताओं को अपना-अपना यज्ञ भाग प्राप्त करने के लिए निमंत्रित किया, किन्तु शंकर जी को उन्होंने इस यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया,सती ने जब सुना कि हमारे पिता एक अत्यंत विशाल यज्ञ का अनुष्ठान कर रहे हैं,तब वहां जाने के लिए उनका मन व्याकुल हो उठा। अपनी यह इच्छा उन्होंने भगवान शिव को बताई। भगवान शिव ने कहा-”प्रजापति दक्ष किसी कारणवश हमसे रुष्ट हैं,अपने यज्ञ में उन्होंने सारे देवताओं को निमंत्रित किया है किन्तु हमें जान-बूझकर नहीं बुलाया है।ऐसी स्थिति में तुम्हारा वहां जाना किसी प्रकार भी श्रेयस्कर नहीं होगा।”

शंकर जी के इस उपदेश से देवी सती का मन बहुत दुखी हुआ। पिता का यज्ञ देखने वहां जाकर माता और बहनों से मिलने की उनकी व्यग्रता किसी प्रकार भी कम न हो सकी। उनका प्रबल आग्रह देखकर शिवजी ने उन्हें वहां जाने की अनुमति दे दी। सती ने पिता के घर पहुंचकर देखा कि कोई भी उनसे आदर और प्रेम से बातचीत नहीं कर रहा है। केवल उनकी माता ने ही स्नेह से उन्हें गले लगाया। परिजनों के इस व्यवहार से देवी सती को बहुत क्लेश पहुंचा। उन्होंने यह भी देखा कि वहां भगवान शिव के प्रति तिरस्कार का भाव भरा हुआ है,दक्ष ने उनके प्रति कुछ अपमानजनक वचन भी कहे।

यह सब देखकर सती का ह्रदय ग्लानि और क्रोध से संतप्त हो उठा। उन्होंने सोचा कि भगवान शंकर जी की बात न मानकर यहां आकर मैंने बहुत बड़ी गलती की है। वह अपने पति भगवान शिव के इस अपमान को सहन न कर सकीं,उन्होंने अपने उस रूप को तत्काल वहीं योगाग्नि द्वारा जलाकर भस्म कर दिया। वज्रपात के समान इस दारुणं-दुखद घटना को सुनकर शंकर जी ने क्रुद्ध हो अपने गणों को भेजकर दक्ष के उस यज्ञ का पूर्णतः विध्वंस करा दिया। सती ने योगाग्नि द्वारा अपने शरीर को भस्म कर अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया। इस बार वह शैलपुत्री नाम से विख्यात हुईं। पार्वती,हेमवती भी उन्हीं के नाम हैं। इस जन्म में भी शैलपुत्री देवी का विवाह भी शंकर जी से ही हुआ।

11:17 AM, 26-Sep-2022

अभिजीत मुहूर्त में करें कलश स्थापना 

अगर आपने अभी तक कलश स्थापना और मां दुर्गा की पूजा किसी कारण से नहीं कर सके हैं तो अभिजीत और चौघड़ियां मुहूर्त में कलश स्थापना करके माता का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

आज का अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 49 मिनट से लेकर 12 बजकर 37 मिनट तक 

चर, लाभ, अमृत चौघड़िया मुहूर्त – दोपहर 1 बजकर 45 मिनट से शाम 6 बजे तक

 

10:23 AM, 26-Sep-2022

नवरात्रि पर मां दु्र्गा की पूजा के दौरान करें इन नियमों का पालन

– नवरात्रि के पूरे दिन व्रत रखना चाहिए। अगर आप किसी कारण से पूरे 9 दिनों तक व्रत नहीं रख सकते तो पहले, चौथे और आठवें दिन व्रत जरूर रखें।

– घर पर नौ दिनों तक मां दुर्गा के नाम की अखंड ज्योति जरूर रखें।

– नवरात्रि पर देवी दुर्गा की प्रतिमा के साथ, मां लक्ष्मी और देवी सरस्वती की प्रतिमा को स्थापित कर 9 दिनों तक पूजन करें।

– मां दु्र्गा को 9 दिनों तक अलग-अलग दिन के हिसाब से भोग जरूर लगाएं। इसके अलावा मां को प्रतिदिन लौंग और बताशे का भोग अर्पित करें।

– दु्र्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करें।

– पूजा में मां को लाल वस्त्र और फूल चढ़ाएं।

09:53 AM, 26-Sep-2022

नवरात्रि पर बिना मां की आरती “जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी” के पूजा नहीं होती पूरी

मां दुर्गाजी की आरती / Durga Mata Ki Aarti Jai Ambe Gauri 

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी

तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।।

ॐ जय अम्बे गौरी।।

मांग सिंदूर विराजत, टीको जगमद को।

उज्जवल से दो नैना चन्द्रवदन नीको।।

ॐ जय अम्बे गौरी।।

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।

रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै।।

ॐ जय अम्बे गौरी।।

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।

सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी।।

ॐ जय अम्बे गौरी।।

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती

कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति।।

ॐ जय अम्बे गौरी।।

शुंभ निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।

धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती।।

ॐ जय अम्बे गौरी।।

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।

मधु-कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।

ॐ जय अम्बे गौरी।।

ब्रम्हाणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।

आगम निगम बखानी, तुम शव पटरानी।।

ॐ जय अम्बे गौरी।।

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।

बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू।।

ॐ जय अम्बे गौरी।।

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।

भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता।।

ॐ जय अम्बे गौरी।।

भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।

मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी।।

ॐ जय अम्बे गौरी।।

कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।

श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति।।

ॐ जय अम्बे गौरी।।

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै।।

ॐ जय अम्बे गौरी।।

 

09:34 AM, 26-Sep-2022

शारदीय नवरात्रि का पहला दिन- कटरा के माता वैष्णो देवी मंदिर में भक्तों की भीड़

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध शक्तिपीठ कटरा माता वैष्णो देवी के मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ी… देखें तस्वीरें…

 

09:01 AM, 26-Sep-2022

देश-दुनिया में इन जगहों पर हैं शक्तिपीठ

आज से नौ दिनों दिन तक चलने वाली शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो गई है। लगातार नौ दिनों तक मां शक्ति की आराधना की जाएगी। घरों में मां दुर्गा विराजेंगी और देवी मां के भक्त श्रद्धापूर्वक मां की पूजा,साधना, जप-तप और ध्यान लगाएंगे। नवरात्रि पर देश के सभी प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर और शक्तिपीठों पर भक्तों की भीड़ एकत्रित होगी। मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा के 51 शक्तिपीठ हैं।  

– बंगाल में सबसे ज्यादा 10 शक्तिपीठ

– उत्तर भारत में 08 शक्तिपीठ

– पश्चिम भारत में 5 शक्तिपीठ

– दक्षिण भारत में 5 शक्तिपीठ

– पूर्वोत्तर भारत में 5 शक्तिपीठ

– मध्य भारत में 2 शक्तिपीठ

– भारत के बाहर 8 शक्तिपीठ

Navratri 2022: जानें देवी मां के 52 शक्तिपीठों के नाम और स्थान, दर्शन के लिए इन शहरों की ओर करें रुख





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