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न्यायालय ने जेएसपीएल मामले में बिजली वितरण लाइसेंस रद्द करने के फैसले को खारिज किया


नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण के 2008 के फैसले को खारिज कर दिया। न्यायाधिकरण ने अपने निर्णय में जिंदल स्टील एंड पावर लि. (जेएसपीएल) के छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में जिंदल औद्योगिक पार्क और दो गांवों को विद्युत वितरण के लाइसेंस को रद्द कर दिया था।

न्यायाधीश अजय रस्तोगी और न्यायाधीश बी वी नागरत्ना की पीठ ने कहा, ‘‘हमने पाया कि अपीलीय न्यायाधिकरण का अपीलकर्ता-जेएसपीएल को दिये गये लाइसेंस को रद्द करने / खारिज करने का निर्णय सही नहीं था… परिणामस्वरूप अपील की अनुमति दी जाती है और अपीलीय न्यायाधिकरण के फैसले को खारिज किया जाता है।’’

न्यायालय का यह निर्णय न्यायाधिकरण के फैसले के खिलाफ जेएसपीएल और तिरूमाला बालाजी अलॉयज प्राइवेट लि. की अपील पर आया है।

बिजली अपीलीय न्यायाधिकरण ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत विनियामक आयोग के 29 नवंबर, 2005 को जारी आदेश को खारिज कर दिया था। उस आदेश में जेएसपीएल को बिजली वितरण का लाइसेंस दिया गया था।

पीठ ने कहा कि राज्य आयोग ने नियमों, कंपनी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और निवेश के साथ औद्योगिक ग्राहकों को होने वाले लाभ पर गौर किया था। औद्योगिक ग्राहकों ने संयंत्र लगाये थे लेकिन उनके पास उस समय बिजली आपूर्ति के कोई अन्य स्रोत नहीं थे।

न्यायालय ने सरकारी प्राधिकरण की इस दलील को खारिज कर दिया कि नियमों के तहत बिजली वितरक से उम्मीद की जाती है कि वह पूरे नगर पालिका क्षेत्र में वितरण का जिम्मा उठाये। जबकि निजी कंपनी कुछ गांव और कुछ औद्योगिक इकाइयों को ही बिजली उपलब्ध करा रही थी जिसके आधार पर लाइसेंस को रद्द कर दिया गया।

पीठ ने कहा, ‘‘नगर पालिका या नगर निगम अथवा राजस्व जिले के निर्धारण का मकसद एक मानक क्षेत्र तय करना है। इसके भीतर दो या दो से अधिक व्यक्ति बिजली वितरण कर सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि एक लाइसेंसधारी को पूरे मानक क्षेत्र में बिजली का वितरण करना होगा।’’

जेएसपीएल ने 1990 में रायगढ़ जिले में स्पॉन्ज आयरन संयंत्र स्थापित किया था। उसे निजी उपयोग के लिये बिजली संयंत्र लगाने की अनुमति मिली थी। बाद में उसे दो गांवों और कई औद्योगिक इकाइयों को बिजली वितरण का लाइसेंस भी मिला।



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