Thursday, December 8, 2022

Online News Portal

वायुसेना दिवस: राष्ट्रपति द्रौपदी...

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह। - फोटो : फाइलख़बर...

Mohan Bhagwat: वर्ण-जाति व्यवस्था...

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत। - फोटो : amar ujalaख़बर सुनेंख़बर सुनें...

Startup India : स्टार्टअप...

ख़बर सुनेंख़बर सुनेंStartup India : देश में स्टार्टअप को बढ़ावा...

Air Force Day: आज...

वायुसेना दिवस पर चंडीगढ़ के साथ शनिवार को पूरी दुनिया भारतीय वायुसेना...
HomeबिहारAmit Shah in...

Amit Shah in Seemanchal: शाह ने सीमांचल से ही क्यों की ‘मिशन बिहार’ की शुरुआत? बेहद संवेदनशील है यह इलाका



Amit Shah in Seemanchal
– फोटो : Agency (File Photo)

भाजपा नेता अमित शाह ने शुक्रवार को बिहार के सीमांचल इलाके में पूर्णिया में एक जनसभा को संबोधित किया। बिहार में जेडीयू-आरजेडी सरकार के गठन के बाद यह उनकी पहली बिहार यात्रा थी। इस जनसभा में उन्होंने लालू यादव और नीतीश कुमार की जोड़ी पर जमकर हमला किया और लगभग एक महीने पुरानी सरकार में बिहार में भय का माहौल होने की बात कही। इस रैली को भाजपा की 2024 लोकसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। लेकिन महत्त्वपूर्ण है कि अमित शाह ने ‘मिशन बिहार’ की शुरुआत सीमांचल से ही क्यों की?

अवैध घुसपैठियों की सबसे पसंदीदा जगह

सीमांचल का यह इलाका देश की सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्त्वपूर्ण माना जाता है। मुस्लिम बहुल आबादी वाला यह इलाका असम और पश्चिम बंगाल की सीमा से जुड़ा हुआ है। पडोसी देश बांग्लादेश से आने वाले अवैध घुसपैठियों की यह सबसे पसंदीदा जगह है, क्योंकि यहां की मुस्लिम बहुल आबादी के बीच वे यहां आसानी से घुलमिल जाते हैं। स्थानीय एजेंट्स की शह पर वे यहां आसानी से फर्जी पहचान पत्र बनवाने में सफल हो जाते हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी उनकी पहचान कर पाना आसान नहीं होता। यहां से बांग्लादेशी घुसपैठिए असम और पश्चिम बंगाल सहित देश के दूसरे इलाकों में आसानी से चले जाते हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस क्षेत्र में अपराध की सबसे ज्यादा वारदातें इन अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण ही होती हैं। घुसपैठिये स्थानीय अपराधियों के साथ मिलकर यहां महिलाओं के अपहरण, जबरन धर्मांतरण और जबरिया विवाह जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं। स्थानीय सहयोग के कारण उनकी धर-पकड़ आसान नहीं होती।

नेपाल से सटे होने के कारण यह इलाका और भी ज्यादा संवेदनशील हो गया है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान से भारत के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचने वाली नशे की खेप नेपाल के रास्ते इसी रूट से देश के अंदर आती है। नेपाल से बेहतर रिश्ते होने से नशे की खेप भारत के अंदर आसानी से पहुंच जाती थी। नेपाल से रिश्तों में कुछ तनाव आने के बाद भी यह रूट नशे के सौदागरों के लिए अभी भी अपेक्षाकृत ज्यादा आसान और सुरक्षित बना हुआ है। इसके पीछे भी स्थानीय लोगों के सहयोग को जिम्मेदार ठहराया जाता है।

लालू से ओवैसी तक की पकड़

बिहार के सीमांचल इलाके में पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया जिले जिले आते हैं। इनमें कुल 24 विधानसभा सीटें हैं। यहां लगभग आधी आबादी (47 फीसदी) मुसलमानों की है। इन पर लंबे समय से लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार की पकड़ बनी हुई है। मुस्लिम मतदाताओं पर अपनी पकड़ के कारण यहां सबसे ज्यादा सफलता इन्हीं दलों को मिलती रही है।

लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में इसी क्षेत्र में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने 14 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और उसे पांच सीटों (अमौर, कोचाधान, जोकिहाट, बायसी और बहादुर गंज) पर सफलता मिली थी। ये सभी सीटें पश्चिम बंगाल और नेपाल की सीमा से सटी हुई हैं। ओवैसी के अन्य छह उम्मीदवारों को सफलता नहीं मिली, जिन्होंने मिथिलांचल से अपनी किस्मत आजमाई थी।

क्या बरकरार रहेगी भाजपा की पकड़?

हालांकि, लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा ने बेहतर रणनीति के साथ चुनाव लड़ा और किशनगंज को छोड़कर बाकी सभी सीटों पर जीत हासिल की थी। बदले राजनीतिक समीकरणों में भाजपा को RJD-JDU महागठबंधन से इस क्षेत्र में कड़ी चुनौती मिल सकती है। एक-एक सीट को अपनी रणनीति के दम पर संभालने के लिए मशहूर अमित शाह ने इसी क्षेत्र से अपनी चुनावी समर की शुरुआत कर नीतीश कुमार को यह इशारा दे दिया है कि बदले समीकरणों में भी वे हार नहीं मानेंगे और इस पर अपना कब्ज़ा बरकरार रखने की पुरजोर कोशिश करेंगे।

भाजपा की ताकत

वरिष्ठ राजनीतिक आलोचक सुनील पाण्डेय ने अमर उजाला से कहा कि नीतीश-लालू गठबंधन के कारण इस बार भाजपा को सीमांचल में सफलता मिलनी मुश्किल हो सकती है। मुसलमान मतदाताओं पर इन नेताओं की पकड़ पहले ही मजबूत है। मुसलमानों के अलावा इस क्षेत्र में पिछड़ी जाति के मतदाता सबसे ज्यादा संख्या में रहते हैं, लिहाजा जातीय समीकरणों के सहारे महागठबंधन यहां बड़ी सफलता प्राप्त कर सकता है। पिछले विधानसभा चुनाव में ओवैसी को इस क्षेत्र में सफलता मिल गई थी।

माना जाता है कि ओवैसी फैक्टर के कारण ही भाजपा-जेडीयू गठबंधन को लाभ मिला और वह सत्ता तक पहुंच गई, जबकि सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बाद भी राजद सत्ता से दूर रह गई। उसके नेता अभी से मुस्लिम मतदाताओं से पिछली बार वाली गलती न दोहराने की अपील करते हुए देखे जा रहे हैं। यदि वे अपने मतदाताओं को अपनी बात समझाने में सफल रहते हैं तो महागठबंधन इस क्षेत्र में दोबारा मजबूत हो सकता है।

53 फीसदी हिंदू मतदाताओं पर नजर

लेकिन इन परिस्थितियों के बाद भी भाजपा के लिए यहां स्थितियां पूरी तरह प्रतिकूल नहीं हुई हैं। अमित शाह इन परिस्थितियों में भी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सफलता हासिल करते रहे हैं। उनकी नजर यहां के 53 फीसदी हिंदू मतदाताओं पर रहेगी, जिसे वे अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर सकते हैं। बिहार में सांप्रदायिक आधार पर मतों का विभाजन अब तक नहीं हुआ है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से यहां भी हनुमान यात्राओं और राम शोभा यात्राओं की बाढ़ आई हुई है। इससे मतदाताओं को एक हद तक प्रभावित करना संभव हो सकता है।

सुनील पांडेय ने कहा कि लालू-नीतीश गठबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षा के मोर्चे पर मिल रही है। अराजक तत्त्वों के कारण इस क्षेत्र में अपराध होते हैं और इससे जनता त्रस्त है। पडोसी देशों से आने वाले घुसपैठियों-अपराधियों के कारण भी यहां के हालात बिगड़े हैं और लोगों की जान-माल को लेकर चिंता बढ़ी है। यदि नीतीश सरकार अपराध पर नियंत्रण पाने में असफल रहती है, तो भाजपा को इस क्षेत्र में भी बड़ी सफलता मिल सकती है। अमित शाह ने अपनी पूर्णिया की रैली में सुरक्षा के मुद्दे पर ही सबसे ज्यादा हमला बोला है तो उसका कारण आसानी से समझा जा सकता है। यदि सुरक्षा के मुद्दे के बूते भाजपा को सीमांचल में बड़ी सफलता मिल जाए तो इस पर कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिये।

भाजपा नेता अमित शाह ने शुक्रवार को बिहार के सीमांचल इलाके में पूर्णिया में एक जनसभा को संबोधित किया। बिहार में जेडीयू-आरजेडी सरकार के गठन के बाद यह उनकी पहली बिहार यात्रा थी। इस जनसभा में उन्होंने लालू यादव और नीतीश कुमार की जोड़ी पर जमकर हमला किया और लगभग एक महीने पुरानी सरकार में बिहार में भय का माहौल होने की बात कही। इस रैली को भाजपा की 2024 लोकसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। लेकिन महत्त्वपूर्ण है कि अमित शाह ने ‘मिशन बिहार’ की शुरुआत सीमांचल से ही क्यों की?

अवैध घुसपैठियों की सबसे पसंदीदा जगह

सीमांचल का यह इलाका देश की सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्त्वपूर्ण माना जाता है। मुस्लिम बहुल आबादी वाला यह इलाका असम और पश्चिम बंगाल की सीमा से जुड़ा हुआ है। पडोसी देश बांग्लादेश से आने वाले अवैध घुसपैठियों की यह सबसे पसंदीदा जगह है, क्योंकि यहां की मुस्लिम बहुल आबादी के बीच वे यहां आसानी से घुलमिल जाते हैं। स्थानीय एजेंट्स की शह पर वे यहां आसानी से फर्जी पहचान पत्र बनवाने में सफल हो जाते हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी उनकी पहचान कर पाना आसान नहीं होता। यहां से बांग्लादेशी घुसपैठिए असम और पश्चिम बंगाल सहित देश के दूसरे इलाकों में आसानी से चले जाते हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस क्षेत्र में अपराध की सबसे ज्यादा वारदातें इन अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण ही होती हैं। घुसपैठिये स्थानीय अपराधियों के साथ मिलकर यहां महिलाओं के अपहरण, जबरन धर्मांतरण और जबरिया विवाह जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं। स्थानीय सहयोग के कारण उनकी धर-पकड़ आसान नहीं होती।

नेपाल से सटे होने के कारण यह इलाका और भी ज्यादा संवेदनशील हो गया है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान से भारत के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचने वाली नशे की खेप नेपाल के रास्ते इसी रूट से देश के अंदर आती है। नेपाल से बेहतर रिश्ते होने से नशे की खेप भारत के अंदर आसानी से पहुंच जाती थी। नेपाल से रिश्तों में कुछ तनाव आने के बाद भी यह रूट नशे के सौदागरों के लिए अभी भी अपेक्षाकृत ज्यादा आसान और सुरक्षित बना हुआ है। इसके पीछे भी स्थानीय लोगों के सहयोग को जिम्मेदार ठहराया जाता है।

लालू से ओवैसी तक की पकड़

बिहार के सीमांचल इलाके में पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया जिले जिले आते हैं। इनमें कुल 24 विधानसभा सीटें हैं। यहां लगभग आधी आबादी (47 फीसदी) मुसलमानों की है। इन पर लंबे समय से लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार की पकड़ बनी हुई है। मुस्लिम मतदाताओं पर अपनी पकड़ के कारण यहां सबसे ज्यादा सफलता इन्हीं दलों को मिलती रही है।

लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में इसी क्षेत्र में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने 14 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और उसे पांच सीटों (अमौर, कोचाधान, जोकिहाट, बायसी और बहादुर गंज) पर सफलता मिली थी। ये सभी सीटें पश्चिम बंगाल और नेपाल की सीमा से सटी हुई हैं। ओवैसी के अन्य छह उम्मीदवारों को सफलता नहीं मिली, जिन्होंने मिथिलांचल से अपनी किस्मत आजमाई थी।

क्या बरकरार रहेगी भाजपा की पकड़?

हालांकि, लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा ने बेहतर रणनीति के साथ चुनाव लड़ा और किशनगंज को छोड़कर बाकी सभी सीटों पर जीत हासिल की थी। बदले राजनीतिक समीकरणों में भाजपा को RJD-JDU महागठबंधन से इस क्षेत्र में कड़ी चुनौती मिल सकती है। एक-एक सीट को अपनी रणनीति के दम पर संभालने के लिए मशहूर अमित शाह ने इसी क्षेत्र से अपनी चुनावी समर की शुरुआत कर नीतीश कुमार को यह इशारा दे दिया है कि बदले समीकरणों में भी वे हार नहीं मानेंगे और इस पर अपना कब्ज़ा बरकरार रखने की पुरजोर कोशिश करेंगे।

भाजपा की ताकत

वरिष्ठ राजनीतिक आलोचक सुनील पाण्डेय ने अमर उजाला से कहा कि नीतीश-लालू गठबंधन के कारण इस बार भाजपा को सीमांचल में सफलता मिलनी मुश्किल हो सकती है। मुसलमान मतदाताओं पर इन नेताओं की पकड़ पहले ही मजबूत है। मुसलमानों के अलावा इस क्षेत्र में पिछड़ी जाति के मतदाता सबसे ज्यादा संख्या में रहते हैं, लिहाजा जातीय समीकरणों के सहारे महागठबंधन यहां बड़ी सफलता प्राप्त कर सकता है। पिछले विधानसभा चुनाव में ओवैसी को इस क्षेत्र में सफलता मिल गई थी।

माना जाता है कि ओवैसी फैक्टर के कारण ही भाजपा-जेडीयू गठबंधन को लाभ मिला और वह सत्ता तक पहुंच गई, जबकि सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बाद भी राजद सत्ता से दूर रह गई। उसके नेता अभी से मुस्लिम मतदाताओं से पिछली बार वाली गलती न दोहराने की अपील करते हुए देखे जा रहे हैं। यदि वे अपने मतदाताओं को अपनी बात समझाने में सफल रहते हैं तो महागठबंधन इस क्षेत्र में दोबारा मजबूत हो सकता है।

53 फीसदी हिंदू मतदाताओं पर नजर

लेकिन इन परिस्थितियों के बाद भी भाजपा के लिए यहां स्थितियां पूरी तरह प्रतिकूल नहीं हुई हैं। अमित शाह इन परिस्थितियों में भी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सफलता हासिल करते रहे हैं। उनकी नजर यहां के 53 फीसदी हिंदू मतदाताओं पर रहेगी, जिसे वे अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर सकते हैं। बिहार में सांप्रदायिक आधार पर मतों का विभाजन अब तक नहीं हुआ है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से यहां भी हनुमान यात्राओं और राम शोभा यात्राओं की बाढ़ आई हुई है। इससे मतदाताओं को एक हद तक प्रभावित करना संभव हो सकता है।

सुनील पांडेय ने कहा कि लालू-नीतीश गठबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षा के मोर्चे पर मिल रही है। अराजक तत्त्वों के कारण इस क्षेत्र में अपराध होते हैं और इससे जनता त्रस्त है। पडोसी देशों से आने वाले घुसपैठियों-अपराधियों के कारण भी यहां के हालात बिगड़े हैं और लोगों की जान-माल को लेकर चिंता बढ़ी है। यदि नीतीश सरकार अपराध पर नियंत्रण पाने में असफल रहती है, तो भाजपा को इस क्षेत्र में भी बड़ी सफलता मिल सकती है। अमित शाह ने अपनी पूर्णिया की रैली में सुरक्षा के मुद्दे पर ही सबसे ज्यादा हमला बोला है तो उसका कारण आसानी से समझा जा सकता है। यदि सुरक्षा के मुद्दे के बूते भाजपा को सीमांचल में बड़ी सफलता मिल जाए तो इस पर कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिये।



Source link

Deal of the day

Get notified whenever we post something new!

spot_img

Job Book dot in

सरकारी नौकरी अलर्ट jobbook.in

spot_img

निशुल्क विज्ञापन

विज्ञापन देने के लिए Register Now पर क्लिक करें

Continue reading

लव राशिफल 8 अक्टूबर: इन राशि वालों की लव लाइफ में आएंगी मुश्किलें, टूट सकता है रिश्ता

मेष राशि: सबसे ज्यादा संभावना वाले स्थानों में रोमांस खिल सकता है, इसलिए इसके संकेतों के लिए अपनी आंखें खुली रखें। आपके पास सहकर्मी क्रश के साथ ज्यादा समय बिताने का अवसर हो सकता है। अगर आप दोनों...

वायुसेना दिवस: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह आज चंडीगढ़ में, सुखना पर देखेंगे एयर शो

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह। - फोटो : फाइलख़बर सुनेंख़बर सुनेंराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शनिवार दोपहर चंडीगढ़ पहुंचेंगे। दोनों लोग वायुसेना दिवस पर सुखना लेक पर होने वाले एयर...

Fact Check: एटीएम से 4 बार से ज्यादा निकाले रुपये तो कटेंगे 173 रुपये! क्या आपके पास आया बैंक का ये मैसेज? जानें सच्चाई

नई दिल्ली: अगर आपने एटीएम से 4 बार से ज्यादा रुपये निकाले तो आपको 173 रुपये कट जाएंगे। इसका मतलब है कि बैंक के एटीएम से आप 4 बार ही फ्री में रुपये निकाल सकते हैं। इसके बाद...

ताजा तरीन खबरें प्राप्त करें

सोशल मिडिया अकाउंट के माध्यम से हमसे जुड़े